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Monday, October 23, 2023

ना हो निर्दोषों का नर-संहार

            ना हो निर्दोषों का नर - संहार 

इज़रायल पर हमास के रॉकेटों से हमले और निर्दोष इज़रायली नागरिकों के अपहरण और हत्याओं की जितनी निंदा की जाए, कम है।

लेकिन अब इज़रायल भी जो हमले कर रहा है उसमें भी निर्दोष नागरिकों की ही जानें जा रही है। 

सबसे अधिक दुःख की बात है कि दोनों ही देशों की महिलाओं और बच्चों को भी बख्शा नहीं जा रहा है। हमला-पीड़ितों मुख्य रूप से मासूम बच्चों और महिलाओं के हृदय विदारक फोटो देख कर शायद ही कोई व्यक्त्ति होगा जिसका मन वेदना से न भरा हो। 

इसका जिम्मेदार कौन है - इस विषय पर एक अंतहीन बहस भी जारी है।

लेकिन सबसे ज्यादा जिम्मेदार वो है जिसने अभी शुरुआत करी। 

आतंकवाद से किसी का भी भला नहीं हो सकता है। लेकिन आतंकवाद के दुष्परिणाम सदैव भयानक ही होते हैं।

क्या आतंकवादियों को मालूम नहीं था कि वो जो हमले एवं हत्याएँ करने जा रहे हैं, उनकी प्रतिक्रिया क्या होगी ?

जब आतंकवादियों ने हमले के लिए महीनों तक एक गुप्त योजना बनाई,तो क्या उस हमले की प्रतिक्रिया स्वरूप होने वाले आक्रमण से खुद को सुरक्षित रखने के लिए कोई प्लान नहीं बनाया होगा। अवश्य बनाया होगा पर सिर्फ़ और सिर्फ़ स्वयं को सुरक्षित रखने हेतु।

जिन लोगों के नाम पर वो ये सब विध्वंस कर रहे थे उन बेचारों को तो वे बेसहारा छोड़ गए। 

यदि वो वास्तव में उनके हितैषी होते तो ऐसे शान्ति भंग करने की पहल कभी नहीं करते क्योंकि उन्हें अच्छी तरह मालूम था कि उनके हमले के जवाब में भी हमले ही होंगे।

आतंकवादी भी इंसान ही होते हैं उनके सीने में भी दिल ही होता है जो किसी भी निर्दोष व्यक्ति की जान नहीं लेना चाहता। परन्तु उनका ब्रेन वाश करके उन्हें गुमराह किया जाता है।

अभी भी सैकड़ों नए आतंकवादियों को भड़काया जा रहा होगा।अभी हुए हमलों से भी भयंकर हमलों के बीज बोए जा रहे होंगे।

काश हम इस आतंकवादी मानसिकता को ही जन्म लेने से रोक पाये।

श्रीकृष्ण ने कहा था शान्ति किसी भी कीमत पर मिले तो भी सस्ती है।

कितनी भी अभेद्य सुरक्षा की व्यवस्था कर लीजिए उसे भी कोई ना कोई भेद ही देगा।

नित नई तकनीक और हथियारों का दुरुपयोग रोकने में असमर्थ हम - अपनी मानव जाति को ही नहीं अपितु सभी प्राणियों एवं पर्यावरण को एक ऐसे खतरे की और धकेल रहे हैं जिसकी भरपाई कभी भी नहीं हो पाएगी।

जिस युद्ध विभीषिका से बचने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ UNO की स्थापना की गई थी उसकी भी कोई सुन नहीं रहा है।

लगता है कि अब पूरी दुनिया के सभी शांतिप्रिय इंसानों को ही आतंकवाद और युद्ध के विरोध में एकजुट होकर मुखर होना होगा, अपनी आवाज आतंकवाद के हर रूप के खिलाफ सशक्त तरीके से बुलन्द करनी होगी - हर देश में, हर धर्म में।

वरना जो रूस - यूक्रेन में हुआ, जो इज़रायल - गाज़ा पट्टी में हो रहा है वो किसी दिन आपके यहां भी हो सकता है।

- मधुकांता श्रृंगी,
कोटा - राजस्थान

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