इस स्वतंत्रता दिवस पर सबसे ज्यादा बधाई का अधिकार हमारे उन लोगों का है, जिन्होंने भारत को आज़ादी मिलने के बाद जन्म लिया था |
हमारे ये देशवासी जितना ज्यादा बुरा से बुरा सोच सकते हैं भारत में ग़ुलामी का काल उससे भी कई गुना ज्यादा बुरा था |
इतना बुरा था कि उसके बारे में लिखना या किसी भी माध्यम से दिखाना,सुनाना असम्भव है |
यदि सम्भव हो भी जाये तो भी हमारी संस्कृति हमें मर्यादा लाँघने की अनुमति नहीं देती है |
अतः आप लोग जिन परिस्थितियों को कठिन समझते हो वो तो बिल्कुल भी कठिन नहीं है | कठिनाइयों भरा जीवन तो हमारे बुजुर्गों, पूर्वजों ने देखा था जिन्होंने अपना सुख,सारी सुविधाएँ,अपना परिवार तक त्याग दिया था | अपना सब कुछ बलिदान कर दिया था,अपने जीवन तक की भी आहुति दे दी थी- शहीद हो गए थे कि उनके देश की भावी पीढ़ियाँ - स्वतन्त्र भारत में ससम्मान जीवन जी सके |
हमारे लाखों-करोड़ों देशवासी शहीद हुए परन्तु आप लोगों को उनमें से केवल कुछ लोगों के बारे में ही जानकारी है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि बाकी शहीदों का त्याग व्यर्थ गया |
बिल्कुल भी नहीं अपितु हम उन असंख्य,अज्ञात शहीदों के और ज्यादा आभारी हैं जिनके नामों का कहीं कोई उल्लेख नहीं है |
इतने बड़े राष्ट्र की आज़ादी केवल चंद लोगों के प्रयासों से सम्भव नहीं थी | और भारत ने तो दशकों तक नहीं, शताब्दियों तक दासत्व का विषैला दंश झेला था |
पहले मुगलों की ग़ुलामी का, फिर अंग्रेजों की ग़ुलामी का |
परंतु फिर भी हमारे लिए बहुत गर्व की बात है कि हमारे पूर्वजों ने हर हाल में हमारी सभ्यता, हमारी संस्कृति को जीवित रखा |
अन्यथा आप स्वयं सोचिये कि इतनी शताब्दियों की दासता, इतने दबावों, इतने असहनीय-अमानवीय अत्याचारों के बावजूद हमने हमारा धर्म नहीं छोड़ा, हमारे त्यौहार, हमारी पूजा, हमारे भगवान नहीं छोड़े |
यहाँ तक कि हमारे मन्दिरों को तोड़ दिया गया था लेकिन हमने अपने हृदयों में - हमारे भगवानों को बसाये रखा - जब तक कि उन्हें पुनः उनके मूल स्वरूप में उन्हीं मन्दिरों में पुनर्स्थापित न कर दे |
यहाँ पर यह उल्लेख करना भी अत्यन्त आवश्यक है कि इतनी लम्बी दासता की अवधि में भी, हमने किसी भी अन्य धर्म को कोई नुकसान, कोई क्षति नहीं पहुंचाई |
परन्तु हमारे इसी सर्व -धर्म समभाव को हमारी कमज़ोरी समझा गया | यही नहीं हमें आपस में लड़ाने-भिड़ाने की साज़िशें की गयी और आज तक करी जा रहीं हैं |
स्वतंत्र भारत में जन्मी नयी पीढ़ी से अधिक बधाई के पात्र हैं हमारे आदरणीय वो बुजुर्ग भारतीय जिन्होंने पराधीन भारत में जन्म तो लिया परन्तु सोच जिनकी हमेशा स्वाधीनता और स्वावलंबन की रही |
बधाई, बहुत बहुत बधाई हमारी तीनों सेनाओं - हमारी थल सेना,हमारी वायुसेना और हमारी नौसेना - के वीर सैनिकों को जो अपने अदम्य साहस के साथ बिना थके,निरंतर हमारे देश की रक्षा करते हैं और हमारी आजादी के लिए सहर्ष- अपने प्राण भी न्यौछावर करने में कभी पीछे नहीं रहते हैं |
आप लोगों में कितने ही व्यक्तियों ने अपने किसी रिश्तेदार के ऑपरेशन के लिए चिकित्सा कर्मचारियों द्वारा दिए गए अनुमति-पत्र पर हस्ताक्षर किए होंगे |
सत्य बताना - "क्या उस समय आपके हाथ काँपने लगे थे ?"
आप में से अधिकतर का उत्तर "हाँ " ही होगा |
एक अनुमति पत्र पर हस्ताक्षर करने में सामान्य लोगों की हिम्मत साथ नहीं देती, वो अनुमति जिसमें स्वस्थ होने की संभावना अधिक होती है और मरने की कम |
तो कभी कल्पना की है कि उन लोगों का, उनके परिवार वालों का क्या हाल होता होगा जिनके यहाँ से वीर हमारी सेनाओं में भर्ती होते हैं, शहीद होते हैं ?
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