_______*अन्यथा, सब मिथ्या है*____
जब ऑंसू
मेरी आँख में
आए
और तुम
मेरे अश्रुओं को
गिरने से
पहले ही
रोक दो
तो रिश्ता सच्चा है
अन्यथा
सब मिथ्या है।
जब तुम्हें ज़रूरत ना हो
मेरे शब्दों की
मेरे बोले बिना ही
तुम मुझे
सही
समझ जाओ तो
रिश्ता सच्चा है
अन्यथा, सब मिथ्या है।
रिश्ता चाहे
ख़ून का हो
चाहे हो सगा
या हो रिश्ता
सिर्फ़ प्रेम का
जब हम साथ हँसे
और साथ में रोये
तो ही
रिश्ता सच्चा है
अन्यथा, सब मिथ्या है।
जब एक पुकार पे ही
तुम
आ जाओ
तो रिश्ता सच्चा है
अन्यथा, सब मिथ्या है।
जब तुम्हें
मेरा आना
महज एक औपचारिकता
निभाना ही ना लगे
तो रिश्ता सच्चा है
अन्यथा, सब मिथ्या है।
- मधुकान्ता श्रृंगी