ज़ब ये लगने लगे कि कोई रास्ता नहीं बाकी
मेरी मुसीबतें कम होती ही नहीं
कोई मुझे समझता ही नहीं
किसी को मेरी ज़रूरत नहीं
अब कोई मेरी मदद नहीं
कर सकता
क्यों मैं अपने को
और मेरे अपनों को
ज्यादा दुःख दूँ
क्या फ़र्क पड़ता है
किसी को
मेरे होने या
ना होने से
तो बच्चे
ये समझ लेना
कि मृत्यु
हो गयी तुम्हारी
पर आत्महत्या Suicide मत करना
उस निराशा भरी जिंदगी की
समाप्ति करके
अब एक नयी शुरुआत करना
ना, मैं वही घिसी-पिटी लाइन्स
नहीं रिपीट कर रही
बल्कि एक नया रास्ता
दिखाने की कोशिश है
नयी शुरुआत से मतलब है
अब ज़िन्दगी को उस तरह
मत जियो , जैसे अब तक
जीते थे
अब बहते चलो
नदी में
तिनके की तरह
जहाँ वो ले जाये
तुम्हें तिनका सम्बोधित करने का
आशय तुम्हारी इज्जत में कमी करना , हरगिज नहीं
अपितु तुम्हें तिनके जैसा हल्का , महसूस करवाना है
जब ज़िन्दगी, अपनी ज़िंदगी ही
तुम ना ज़ी सको , अपनी इच्छा से
या अपने प्रियजनों की
मन-मर्जी के अनुरूप भी
तो चुनो उस मार्ग को
जिसका निर्माण भगवान ने
तुम्हारे लिए ही किया
क्योंकि व्यर्थ ही तो
कोई कुछ बनाता नहीं
फिर भगवान ने भी तो
तुम्हें यूँ ही
तो रचा नहीं
बहते चलो
जहाँ तुम्हें
तुम्हारी नदिया
ले जाये
उड़ चलो
जहाँ तुम्हें
हवा ले जाये
इतनी बड़े ब्रह्माण्ड में
अपना अस्तित्व
तिनके से भी तो
छोटा ही है
एक बार
तिनका बन कर तो देखो
बहते चलो
एक बार बह कर तो देखो
क्योंकि तिनका कभी
डूबता नहीं
क्योंकि तिनका कभी
डूबता नहीं ।
- मधुकांता श्रृंगी
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