मुस्कान की कोई कीमत नहीं होती , मगर यह बहुत कुछ रचती है ।
यह पाने वाले को खुशहाल करती है ,
देने वाले का कुछ घटता नहीं ।
यह क्षणिक होती है ,
लेकिन यादों में सदा के लिए रह सकती है।
कोई इतना अमीर नहीं कि इसके बगैर काम चला ले ,
और कोई इतना गरीब नहीं कि इसके फायदों को न पा सके ।
यह घर में खुशहाली लाती है , व्यवहार में ख्याति बढ़ाती है ,
यह मित्रता की पहचान है।
यह थके हुओं के लिए आराम है ,
निराश लोगों के लिए रोशनी ,
उदास के लिए सुनहरी धूप
हर मुश्किल के लिए कुदरत की सबसे अच्छी दवा।
तब भी न तो यह भीख में , न खरीदने से ,
न उधार माँगने से और न चुराने से मिलती है।
क्योंकि यह ऐसी चीज़ है जो तब तक किसी काम की नहीं ,
जब तक आप इसे किसी को दे न दें।
दिन भर की भाग-दौड़ में , कुछ परिचित हो सकते हैं
इतने थके हों कि मुस्करा न सके।
तो उन्हें अपनी ही मुस्कान दीजिये।
किसी को मुस्कान की इतनी ज़रुरत नहीं होती
जितनी कि उसे , जो खुद किसी को अपनी मुस्कान न दे सके।
-ब्र्ह्मा कुमारी के पोस्टर से साभार
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